आजमगढ़ के लाल आलोक प्रसाद बने कानपुर देहात के नए एएसपी जानिए वैज्ञानिक सोच वाले इस अधिकारी की पूरी प्रोफाइल
बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर और 12 साल का अनुभव अब कानपुर देहात में दिखेगा नए एएसपी का दम

- आजमगढ़ निवासी पीपीएस अधिकारी आलोक प्रसाद कानपुर देहात के नए अपर पुलिस अधीक्षक नियुक्त।
- एमएससी (इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी) तक उच्च शिक्षित हैं नए एएसपी।
- 2012 बैच के अधिकारी हैं और 2014 से लगातार पुलिस सेवा में सक्रिय हैं।
- सीतापुर में डीएसपी रहने के बाद अब कानपुर देहात में संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी।
कानपुर देहात: कानपुर देहात जनपद में प्रशासनिक फेरबदल के तहत अनुभवी पीपीएस अधिकारी आलोक प्रसाद को नया अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) नियुक्त किया गया है। वे निवर्तमान एएसपी राजेश पाण्डेय का स्थान लेंगे, जिनका तबादला कमिश्नरेट गाजियाबाद में हुआ है। उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, आलोक प्रसाद एक बेहद सुलझे हुए और उच्च शिक्षित अधिकारी हैं, जो अब जनपद की सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालेंगे।
आजमगढ़ से कानपुर देहात तक का सफर
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के रहने वाले आलोक प्रसाद का व्यक्तित्व और उनका करियर ग्राफ काफी प्रभावशाली है। उनके पिता अम्बिका प्रसाद के मार्गदर्शन में पले-बढ़े आलोक प्रसाद की शैक्षणिक योग्यता उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग खड़ा करती है। उन्होंने M.Sc (इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी) की उच्च शिक्षा प्राप्त की है। विज्ञान की इस गहरी समझ का लाभ अक्सर उनकी पुलिसिंग और जटिल मामलों की गुत्थी सुलझाने में देखने को मिलता है।
पुलिस सेवा का शानदार अनुभव
आलोक प्रसाद 2012 बैच के पीपीएस (प्रांतीय पुलिस सेवा) अधिकारी हैं। उन्होंने 5 सितंबर 2014 को पुलिस सेवा में कार्यभार ग्रहण किया था। अपने 12 वर्षों के करियर में उन्होंने विभाग के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। 10 अगस्त 2019 को उन्हें सीनियर स्केल प्राप्त हुआ। कानपुर देहात में एएसपी के पद पर तैनाती से पहले वे सीतापुर जनपद में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
कानपुर देहात के लिए क्यों खास हैं आलोक प्रसाद?
एक वैज्ञानिक पृष्ठभूमि (बायोटेक्नोलॉजी) से आने के कारण आलोक प्रसाद को आधुनिक साक्ष्य संकलन और फॉरेंसिक जांच का विशेषज्ञ माना जाता है। कानपुर देहात जैसे संवेदनशील जनपद में, जहाँ ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत अपराधियों को सजा दिलाने पर जोर दिया जा रहा है, वहां आलोक प्रसाद की तकनीकी सूझबूझ और सीतापुर जैसी जगहों का अनुभव कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत करेगा।
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