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यूपी के सरकारी स्कूलों में कैच-अप अभियान: लापरवाही पर नपेंगे शिक्षक और अफसर, शासन का कड़ा फरमान

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में अब ढर्रे पर काम नहीं चलेगा। सरकारी प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में बच्चों के गिरते शैक्षिक स्तर और लर्निंग गैप (सीखने की कमी) को लेकर योगी सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है

लखनऊ/कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में अब ढर्रे पर काम नहीं चलेगा। सरकारी प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में बच्चों के गिरते शैक्षिक स्तर और लर्निंग गैप (सीखने की कमी) को लेकर योगी सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (एनएएस) की रिपोर्ट में सामने आईं कमियों के बाद शासन ने पूरे प्रदेश में कैच अप शिक्षण रणनीति को तत्काल प्रभाव से लागू करने का ब्रह्मास्त्र चला दिया है। विशेष सचिव बेसिक शिक्षा की ओर से जारी इस हाई-लेवल आदेश में साफ कर दिया गया है कि बच्चों को उनकी कक्षा के अनुरूप न्यूनतम दक्षता न दिला पाने वाले शिक्षकों और मॉनिटरिंग में ढिलाई बरतने वाले अफसरों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी। शासनादेश के अनुसार अब पारंपरिक तरीके से केवल सिलेबस पूरा कराने की खानापूर्ति नहीं होगी। स्कूलों को अपनी पूरी शिक्षण पद्धति बदलनी होगी जिसके तहत 8 मुख्य रणनीतियां तय की गई हैं। अब बच्चों को उनकी उम्र या कक्षा के बजाय इस आधार पर समूहों में बांटा जाएगा कि उन्हें कितना आता है। कमजोर बच्चों के लिए विशेष फोकस ग्रुप बनेंगे। कैच-अप क्लासेस के लिए हर स्कूल को अपनी दैनिक समय-सारणी में अनिवार्य रूप से अलग से समय (पीरियड) निर्धारित करना होगा। शिक्षक केवल सही उत्तर नहीं जांचेंगे बल्कि बच्चा कहाँ और क्यों अटक रहा है इसकी गहराई से पड़ताल करेंगे। क्लास में ऐसा माहौल बनाया जाएगा जहां बच्चा गलती करने पर डांट के डर से सहमे नहीं बल्कि खुलकर अपनी समस्या बता सके। पहले मैं सिखाऊंगा, फिर हम साथ करेंगे और अंत में तुम खुद करोगे (I Do, We Do, You Do) के सिद्धांत पर पढ़ाई होगी। इस अभियान को सिर्फ कागजों तक सीमित रहने से रोकने के लिए शासन ने जवाबदेही की लक्ष्मण रेखा भी खींच दी है। हर स्कूल के हेडमास्टर को रोजाना प्रत्येक कक्षा की प्रोग्रेस रिपोर्ट देखनी होगी। अगर उनके स्कूल का रिजल्ट खराब मिला तो पहली गाज हेडमास्टर पर गिरेगी। एआरपी को सिर्फ दफ्तर में बैठकर रिपोर्टिंग करने के बजाय अनिवार्य रूप से स्कूलों का ऑन-साइट दौरा करना होगा और शिक्षकों को ग्राउंड पर ट्रेनिंग देनी होगी। हर शिक्षक के लिए अपनी दैनिक शिक्षक डायरी में बच्चों के सुधार का डेटा लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। निरीक्षण के दौरान डायरी खाली मिलने पर तत्काल सस्पेंशन तक की कार्यवाही हो सकती है। इस पूरे महाभियान की मॉनिटरिंग सीधे राज्य स्तर से की जाएगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर महीने प्रोग्रेस रिपोर्ट शासन को भेजें। जो शिक्षक और अधिकारी इस लक्ष्य को पूरा करने में नाकाम रहेंगे उनकी वार्षिक प्रविष्टि खराब की जाएगी और वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है। वहीं बेहतर काम करने वाले उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य स्तर पर पुरस्कृत कर रोल मॉडल बनाया जाएगा। बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पाण्डेय ने कहा कि
शासन की मंशानुसार जनपद के सभी परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में कैच-अप शिक्षण विधा को अक्षरशः लागू कराया जाएगा। बच्चों के लर्निंग गैप को भरना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और एकेडमिक रिसोर्स पर्सन को स्कूलों की ऑन-साइट मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। जो भी शिक्षक दैनिक शिक्षक डायरी को अपडेट नहीं रखेंगे या शिक्षण पद्धतियों में लापरवाही बरतेंगे उनके खिलाफ तत्काल विभागीय और अनुशासनात्मक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

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