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राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर इग्नू का वर्चुअल सेमिनार: ‘भारतीय ज्ञान परंपरा: वर्तमान में प्रेरणा स्रोत’

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के क्षेत्रीय केंद्र, लखनऊ द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के उपलक्ष्य में "भारतीय ज्ञान परंपरा: वर्तमान में प्रेरणा स्रोत" विषय पर गूगल मीट के माध्यम से एक सफल वर्चुअल सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार पुखरायां स्थित रामस्वरूप ग्राम उद्योग परास्नातक महाविद्यालय के इग्नू अध्ययन केंद्र के समन्वय से संपन्न

पुखरायां, कानपुर देहात। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के क्षेत्रीय केंद्र, लखनऊ द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के उपलक्ष्य में “भारतीय ज्ञान परंपरा: वर्तमान में प्रेरणा स्रोत” विषय पर गूगल मीट के माध्यम से एक सफल वर्चुअल सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार पुखरायां स्थित रामस्वरूप ग्राम उद्योग परास्नातक महाविद्यालय के इग्नू अध्ययन केंद्र के समन्वय से संपन्न हुआ।

मौलाना आजाद के योगदान पर ज़ोर
वर्चुअल संगोष्ठी का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलगीत की प्रस्तुति के साथ हुआ। इग्नू के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने स्वागत भाषण दिया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाने के उद्देश्य पर प्रकाश डाला और स्वतंत्रता के बाद भारतीय शिक्षा प्रणाली को आकार देने में देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के अमूल्य योगदान पर विशेष ज़ोर दिया।
प्राचीन ग्रंथों की वर्तमान प्रासंगिकता
सेमिनार के मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास और पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर और पूर्व अध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र नाथ कपूर थे। उन्होंने स्वतंत्रता से पूर्व और बाद की शिक्षा प्रणाली में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के योगदान का विस्तार से वर्णन किया। प्रो. कपूर ने प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली, वेदों और ऋचाओं की वर्तमान परिदृश्य में प्रासंगिकता पर चर्चा की। उन्होंने उपनिषदों, अभिज्ञान शाकुंतलम और अष्टाध्यायी जैसे ग्रंथों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें वर्णित शब्द आज भी हमारी शब्दावली का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी भी भारतीय साहित्य से प्रभावित थे और उन्होंने भगवद गीता का अंग्रेजी में अनुवाद किया था।
संवाद, अनुशासन और संस्कृति का महत्व
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हरीश कुमार सिंह ने गुरुकुल प्रणाली को याद करते हुए शिक्षा में संवाद, अनुशासन, चरित्र निर्माण और युगानुकूल मान्यताओं में परिवर्तन की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। इग्नू उप निदेशक डॉ. अनामिका सिन्हा ने सेमिनार का सफलतापूर्वक संचालन करते हुए कहा कि संस्कृति को सहेजने वाले ही शिखर पर पहुंचते हैं क्योंकि संस्कृति हमें अतीत से वर्तमान तक जोड़े रखती है।
सेमिनार में इग्नू के उप निदेशक डॉ. रीना कुमारी, डॉ. जय प्रकाश वर्मा, समन्वयक डॉ. पर्वत सिंह, डॉ. एस.पी., डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. आरपी सिंह, डॉ. वंदना श्रीवास्तव सहित कुल 125 छात्र-छात्राएं और स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
अंत में, अध्ययन केंद्र समन्वयक डॉ. पर्वत सिंह ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा में राम-विश्वामित्र और संदीपन-श्री कृष्ण को याद करते हुए प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं परंपरा को आत्मसात करने का आह्वान किया।

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