पोस्टर से बगावत का ऐलान! धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सीधे ‘मोदी’ पर साधने लगे निशाना
'पेपर चोर के बाद अब वोट चोर की बारी'— लखनऊ में कांग्रेस दफ्तर के बाहर लगे होर्डिंग ने छेड़ी नई सियासी जंग, क्या विपक्ष तय कर रहा है 2027 का नया नैरेटिव?

लखनऊ। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद क्या कांग्रेस अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरकर अपनी भावी राजनीतिक रणनीति को नई धार देने में जुट गई है? राजधानी लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश मुख्यालय के बाहर रातों-रात लगा एक विशालकाय पोस्टर इस वक्त पूरे सूबे के सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का केंद्र बन गया है।
मुख्यालय के मुख्य द्वार पर लगे इस तीखे होर्डिंग पर बड़े और स्पष्ट अक्षरों में लिखा है— “पेपर चोर ने गद्दी छोड़ी, अब वोट चोर की बारी है।” इसके ठीक साथ ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक बड़ी तस्वीर के साथ लिखा गया है— “धन्यवाद जननायक राहुल गांधी, छात्रों के संघर्ष की आवाज़ बनने के लिए।”
NSUI उपाध्यक्ष ने लगवाई होर्डिंग, छात्र आंदोलन से सीधे पीएम पर हमला
राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचाने वाला यह पोस्टर NSUI (यूपी सेंट्रल) के प्रदेश उपाध्यक्ष सौरभ सौजन्य की ओर से लगवाया गया है। इस होर्डिंग के जरिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद आक्रामक राजनीतिक हमला बोला गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह महज एक छात्र संगठन का विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि आगामी चुनावों के लिए विपक्ष द्वारा गढ़े जा रहे ‘मोदी बनाम छात्र-युवा’ के नए राजनीतिक नैरेटिव का स्पष्ट संकेत है।
क्या ‘वोट चोर’ बनेगा विपक्ष का अगला चुनावी हथियार?
नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के देशव्यापी आंदोलन से मिली संजीवनी के बाद अब कांग्रेस इस आक्रामकता को सीधे शीर्ष नेतृत्व यानी प्रधानमंत्री तक ले जाती दिख रही है। यद्यपि कांग्रेस आलाकमान या प्रदेश नेतृत्व द्वारा इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय अभियान घोषित नहीं किया गया है, लेकिन पार्टी मुख्यालय के बाहर इस प्रकार के होर्डिंग का लगना यह साफ करता है कि आने वाले दिनों में सड़क से लेकर सदन तक सियासी घमासान और तेज होने वाला है।
अब सबसे बड़ा सियासी सवाल यही उठ रहा है कि क्या ‘पेपर लीक’ के मुद्दे पर मिली सफलता के बाद अब ‘वोट चोर’ का नारा ही आगामी विधानसभा और लोकसभा राजनीति में विपक्ष का सबसे बड़ा हथियार बनने जा रहा है?



