स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के कम उपयोग पर महानिदेशक सख्त, रिपोर्ट तलब
उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के लिए बनाई गई स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के ठप पड़े होने या बेहद कम इस्तेमाल पर महानिदेशक

लखनऊ/ कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के लिए बनाई गई स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के ठप पड़े होने या बेहद कम इस्तेमाल पर महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय ने गहरी नाराजगी जताई है। राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी की ओर से प्रदेश के सभी जिलों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में एक कड़ा पत्र जारी किया गया है। जारी पत्र के अनुसार समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना और बजट (वर्ष 2022-23 से 2024-25) के तहत परिषदीय उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब स्थापित की गई थीं। इसके सुचारू संचालन और कक्षा-शिक्षण में उपयोग के लिए शासन स्तर से विस्तृत दिशा-निर्देश भी भेजे गए थे। हाल ही में 1 जुलाई 2026 से 10 जुलाई 2026 के बीच विभागीय समीक्षा बैठकों में जब एन०वी०डी०आई०ए० यू०पी० पोर्टल से प्राप्त डेटा की जांच की गई तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। कई जनपदों में इन आधुनिक लैब और स्मार्ट क्लास का यूटिलाइजेशन बेहद कम पाया गया, जिसे महानिदेशक ने अत्यंत खेदजनक माना है।
दैनिक समीक्षा के निर्देश-
कक्षा-शिक्षण को प्रभावी बनाने और सरकारी संसाधनों का पूरा लाभ बच्चों को देने के लिए अब कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। आदेश में कहा गया है कि सभी बीएसए अपने स्तर से प्रतिदिन पोर्टल के माध्यम से इन लैब्स के उपयोग की बारीकी से समीक्षा करेंगे। आगामी समीक्षा बैठकों में खुद राज्य परियोजना निदेशक स्तर पर इसकी प्रोग्रेस जांची जाएगी। लापरवाही बरतने वाले जनपदों और अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही हो सकती है।



