कानपुर देहात: निजी स्कूलों में छात्र सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त, 2 दिन में मांगी वाहनों की पूरी रिपोर्ट
कक्षा 1 से 8 तक के सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को दो दिन के भीतर देनी होगी परिवहन सुरक्षा रिपोर्ट।

राजेश कटियार, कानपुर देहात। जिले के सभी प्राइवेट मान्यता प्राप्त स्कूलों (कक्षा 1 से 8) में बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पाण्डेय ने समस्त खण्ड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने ब्लॉक के सभी निजी स्कूलों से छात्र परिवहन सुरक्षा नियमों के पालन की रिपोर्ट दो दिन के भीतर अनिवार्य रूप से कार्यालय में जमा कराएं। प्रशासन ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई है कि बार-बार निर्देश देने के बाद भी कई स्कूलों ने अब तक वाहनों और चालकों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। पत्र के अनुसार वर्ष 2026 की द्वितीय बैठक दिनांक 20 जुलाई को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होनी तय हुई है। इस बैठक में जिला परिवहन सुरक्षा समिति के समक्ष सभी स्कूलों की रिपोर्ट पेश की जानी है। जो स्कूल जानकारी नहीं देंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जा सकती है।
7 प्रमुख बिंदुओं पर मांगी गई है रिपोर्ट
हर स्कूल स्तर पर विद्यालय वाहन सुरक्षा समिति का गठन कर उसकी बैठकें नियमित रूप से की जाएं। बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों के पास वैध फिटनेस परमिट और चालकों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस व चरित्र सत्यापन (पुलिस वेरिफिकेशन) होना अनिवार्य है। जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर में इनकी नियमित जांच होगी। सड़क सुरक्षा के प्रति बच्चों को जागरूक करने के लिए सभी स्कूलों में सड़क सुरक्षा से संबंधित वॉल पेंटिंग कराई जाए। शासन के नियमों के अनुसार कोई भी स्कूल संचालक निर्धारित परिवहन शुल्क से अधिक पैसा नहीं वसूल सकता। स्कूल वाहनों के चालकों और परिचालकों (कंडक्टरों) को श्रम विभाग द्वारा तय न्यूनतम निर्धारित वेतन दिया जाए। जो बच्चे अपने माता-पिता या निजी साधनों (जैसे ई-रिक्शा, ऑटो, मैजिक, मोटरसाइकिल) से आते हैं उन वाहनों का नंबर, प्रकार और उसमें बैठने वाले बच्चों की संख्या का पूरा डेटा (निर्धारित प्रारूप में) स्कूल को देना होगा। उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली के तहत सभी प्रबंधकों/प्रधानाचार्यों को ₹100 के स्टैंप पेपर पर प्रमाणित शपथ-पत्र देना होगा।लापरवाही पर होगी
कार्यवाही
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने साफ किया है कि इस कार्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। यदि किसी ब्लॉक या स्कूल की लापरवाही के कारण जिला स्तरीय बैठक में डेटा प्रस्तुत नहीं हो पाया तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी और स्कूल प्रशासन की होगी।
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