कानपुर देहात: 400 करोड़ का ‘महा-जमीन घोटाला’, पूर्व एडीएम और बैंक अफसरों पर एफआईआर
थर्मल प्लांट के नाम पर आवंटित 2332 एकड़ जमीन का हुआ अवैध बंदरबांट।

कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद, कानपुर देहात के भोगनीपुर क्षेत्र में हुए करीब 400 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इस मामले में तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों, पावर कंपनियों और बड़े बैंकों के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2011 का है, जब हिमावत पावर और लैन्को अनपरा पावर कंपनियों को थर्मल पावर प्रोजेक्ट लगाने के लिए सात गांवों (चपरघटा, कृपालपुर, भुण्डा, रसूलपुर और भरतौली आदि) की लगभग 2332 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। शर्तों के मुताबिक, कंपनियों को 3 साल के भीतर बिजली उत्पादन शुरू करना था, लेकिन 15 साल बीतने के बाद भी जमीन खाली पड़ी रही।
साजिश और जालसाजी का खुलासा
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कंपनियों ने तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) ओ.के. सिंह और बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश रची। बिना सरकार की अनुमति के, इस बेशकीमती सरकारी और अधिग्रहीत भूमि को बैंकों में गिरवी रख दिया गया और उस पर 1500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज उठा लिया गया। कंपनियों ने न तो वहां बिजली घर बनाया और न ही बैंकों का पैसा चुकाया।
प्रशासन का कड़ा एक्शन
जिलाधिकारी कपिल सिंह के संज्ञान में जब यह बात आई कि बैंक इस सरकारी भूमि को नीलाम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्होंने तुरंत जांच के आदेश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर नीलामी पर रोक लगाई गई और जमीन को वापस सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। तहसीलदार प्रिया सिंह की तहरीर पर अब थाना मूसानगर में दोनों कंपनियों, IDBI, केनरा, PNB बैंक के अधिकारियों और पूर्व एडीएम के खिलाफ जालसाजी और साजिश की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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