छात्र आंदोलनों के तपते चेहरे सौरभ सौजन्य बने एनएसयूआई के नए प्रदेश उपाध्यक्ष, कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह
इस नियुक्ति को राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार और राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की अंतिम सहमति के बाद आधिकारिक तौर पर जारी किया गया।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की छात्र राजनीति में लंबे समय से सक्रिय और युवाओं के हक के लिए सड़क पर लाठियां खाने वाले जुझारू छात्र नेता सौरभ सौजन्य को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने बड़ा सांगठनिक फेरबदल करते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। संगठन के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार और राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की सहमति से हुई इस महत्वपूर्ण नियुक्ति के बाद से ही कांग्रेस और छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को छात्र राजनीति में निरंतर संघर्ष की जीत और जमीनी समर्पण के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
सड़क से लेकर विश्वविद्यालय परिसर तक रहा है संघर्षों का नाता
सौरभ सौजन्य उत्तर प्रदेश के उन गिने-चुने छात्र नेताओं में शुमार हैं, जिन्होंने सत्ता की नीतियों के खिलाफ हमेशा मुखर होकर आवाज बुलंद की है। वह कैंपस की चारदीवारी से बाहर निकलकर जनसरोकारों से जुड़ने वाले नेता माने जाते हैं। इलाहाबाद और लखनऊ के छात्र आंदोलनों में उनकी भूमिका हमेशा अग्रिम पंक्ति में रही है।
उनके राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो उन्होंने छात्र हितों के लिए कई बड़े आंदोलन किए हैं। इस संघर्ष के दौरान उन्हें विपरीत परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ा। अमित शाह के विरोध में पुतला दहन का मामला हो या फिर मोहन भागवत को विरोध स्वरूप गंगाजल देने का साहसिक प्रयास, सौरभ ने कभी अपने कदम पीछे नहीं खींचे। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी उन्होंने उत्तर प्रदेश में युवाओं को जोड़ने में बेहद सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मुकदमे और निष्कासन भी नहीं रोक पाए कदम
छात्र-युवाओं के हक की लड़ाई लड़ने की कीमत भी सौरभ सौजन्य को चुकानी पड़ी। आंदोलनों और तीखे विरोध प्रदर्शनों के चलते उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हुईं। इतना ही नहीं, उन्हें विश्वविद्यालयी स्तर पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई और निष्कासन जैसी गंभीर परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन तमाम चुनौतियों और दमनकारी कदमों ने सौरभ के हौसले को तोड़ने के बजाय उन्हें और अधिक परिपक्व और मुखर बना दिया। फीस वृद्धि, छात्रवृत्ति में कटौती, युवाओं के लिए रोजगार, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण और छात्र अधिकारों जैसे बुनियादी मुद्दों पर वह लगातार आंदोलनरत रहे हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के आम छात्रों और युवाओं के बीच उनकी पहचान एक बेहद जुझारू, बेबाक और विश्वसनीय नेता के रूप में स्थापित हुई है।
शीर्ष नेतृत्व के भरोसेमंद चेहरों में शामिल
सौरभ सौजन्य को पूर्व में कृषि छात्र संघ के निर्वाचित अध्यक्ष के रूप में काम करने का भी एक लंबा संगठनात्मक अनुभव प्राप्त है। कांग्रेस के रणनीतिक हलकों में माना जाता है कि सौरभ पार्टी की नई, युवा सोच और संघर्षशील राजनीति का बेहतरीन प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बेहद करीबी और भरोसेमंद युवा नेताओं में गिना जाता है। संगठन के भीतर उनकी जबरदस्त सक्रियता, कुशल नेतृत्व क्षमता और युवाओं को एकजुट करने की कला को देखते हुए ही एनएसयूआई ने उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
पद नहीं, युवाओं के हक की लड़ाई की जिम्मेदारी: सौरभ सौजन्य
इस बड़ी सांगठनिक नियुक्ति के बाद प्रदेश उपाध्यक्ष सौरभ सौजन्य ने शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बेहद शालीनता और जिम्मेदारी के साथ कहा:
“यह पद मेरे लिए कोई व्यक्तिगत उपलब्धि या जश्न मनाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के लाखों छात्र-युवाओं के अधिकारों के लिए और अधिक मजबूती व शिद्दत से लड़ने की एक बड़ी जिम्मेदारी है।”
उन्होंने साफ किया कि आने वाले दिनों में उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तलाशना, समय पर छात्रवृत्ति सुनिश्चित कराना और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर ब्लॉक से लेकर प्रदेश स्तर तक एक मजबूत युवा आवाज बुलंद करना होगा।
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