कानपुर देहात: संविलियन विद्यालय रसधान में सीडीओ का छापा, कम उपस्थिति पर प्रधानाध्यापक को नोटिस
प्रधानाध्यापक अनुपम पाठक को कारण बताओ नोटिस जारी, लापरवाही पर जताई नाराजगी।

कानपुर देहात: मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल द्वारा आज विकासखंड राजपुर के संविलियन विद्यालय रसधान का औचक निरिक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों में शासन की मंशा के अनुरूप शैक्षणिक गुणवत्ता, मिड-डे मील की व्यवस्था और कायाकल्प के तहत हो रहे कार्यों की जमीनी हकीकत परखना था। मुख्य विकास अधिकारी ने कक्षाओं का अवलोकन किया और छात्रों से संवाद कर उनके पठन-पाठन स्तर को परखा। उन्होंने शिक्षकों को ‘लर्निंग आउटकम’ पर विशेष ध्यान देने और शिक्षण विधियों को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
निरिक्षण के समय मौके पर प्रधानध्यापक अनुपम पाठक, सहायक अध्यापिका मोनिका बाजपेयी एवं अन्य अध्यापक मौक्जे पर उपस्थित मिले वहीँ विद्यालय में कक्षा 08 में कुल 20 पंजीकृत बच्चों का पंजीकरण हुआ है परन्तु मौके पर मात्र 08 बच्चे मौके पर उपस्थित मिले इसके अतिरिक्त कक्षा 7 में कुल 08 बच्चों के सापेक्ष 05 एवं कक्षा में कुल 13 पंजीकृत बच्चों के सापेक्ष मात्र 04 बच्चे उपस्थित मिले। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में छात्रों की कम संख्या पर मुख्य विकास अधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की और सम्बंधित प्रधानध्यापक से इस सम्बन्ध में कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण प्राप्त किये जाने निर्देश दिए । उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत बच्चों का नामांकन बढ़ाने के साथ-साथ उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना प्रधानाध्यापक की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने निर्देश दिए कि अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के अभिभावकों से तत्काल संपर्क किया जाए। शिक्षक स्वयं बच्चों के घर जाकर उन्हें शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करें। यदि किसी भी विद्यालय में उपस्थिति का स्तर संतोषजनक नहीं पाया गया, तो इसके लिए प्रधानाध्यापक और संबंधित नोडल शिक्षक की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।मुख्य विकास अधिकारी ने विद्यालय प्रशासन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि विद्यालय संचालन में किसी भी स्तर पर बरती गई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीँ उन्होंने बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील को भी परखा साथ ही उन्होंने रसोई घर की सफाई और भोजन की गुणवत्ता की भी जांच की।
उन्होंने भोजन में पोषक तत्वों और स्वच्छता मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए । मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देशित किया कि जिन बच्चों के पास ड्रेस नहीं है, उनके अभिभावकों के साथ तत्काल बैठक की जाए। उन्हें अवगत कराया जाए कि शासन द्वारा भेजी गई धनराशि का उपयोग अनिवार्य रूप से बच्चों की यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और बैग खरीदने हेतु ही किया जाए। उन्होंने प्रधानाध्यापक को निर्देश दिए गए कि वे प्रतिदिन बच्चों के ड्रेस की जांच करें। यदि कोई बच्चा बिना ड्रेस के आता है, तो कक्षा अध्यापक उसका कारण स्पष्ट रूप से दर्ज करें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अगले निरीक्षण तक शत-प्रतिशत बच्चे ड्रेस में नहीं पाए गए, तो संबंधित प्रधानाध्यापक के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनमें समानता का भाव लाने के लिए ड्रेस हेतु बजट सीधे खातों में भेजा जा रहा है इस लिए विद्यालय स्तर पर इसकी अनदेखी अक्षम्य है। शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन और स्वच्छता हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने अध्यापकों को निर्देशित किया कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं रुचिकर शिक्षा प्रदान की जाए, जिससे उनकी बौद्धिक क्षमता एवं सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारी एवं विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहे।



