
राजेश कटियार, कानपुर देहात। समाज में कुछ गलत देखकर आवाज उठाना सबसे बड़ा अपराध बन गया है। जो सवाल पूछे, वह नेगेटिव और जो हर गलती पर मुस्कराए वह समाजसेवी। यह तारीफों का ऐसा दौर है जहां आलोचक को दुश्मन और चमचे को चिंतक समझा जाता है। सच अब बिकता नहीं, बस सजाया जाता है रील, पोस्ट और स्टेटस के चमकदार पैक में। जिसे समाज में बदलाव लाने की बेचैनी थी, अब वह भी थककर फीड फिलर बन गया है।
हर जन्मदिन पर प्रशंसा की औपचारिक पोस्ट, हर अपराधी के लिए आप प्रेरणास्रोत हैं वाली लाइनों का झूठा पुलिंदा। अब कोई भ्रष्टाचार करे, पद का दुरुपयोग करे, गलत काम करे तो बस इतना कहिए भाई साहब बहुत व्यस्त रहते हैं समाजसेवा में। कम से कम कोई बुरा तो नहीं मानेगा। सच बोलोगे तो कट जाओगे, तारीफ करोगे तो शेयर हो जाओगे। तो अब सुधारक मत बनिए, प्रशंसक बन जाइए। हर गलती पर मुस्कराइए, हर अपराध पर तालियां बजाइए। कम से कम समाज में तनाव नहीं रहेगा, लोग ब्लॉक भी नहीं करेंगे!
बदलाव की उम्मीद करना अब मूर्खता है क्योंकि समाज अब क्रांतिकारी नहीं रहा, बस कमेंटकारी रह गया है। जहां मुद्दा नहीं, मजा चाहिए। सच नहीं, सजावट चाहिए और हर वो इंसान जो आईना दिखाए उसे फ्रेम से बाहर कर दिया जाता है। अब तो यही मंत्र है तालियों में सुधार है, सवालों में संकट।



