जरा हटकेआपकी बात

एक आदेश, एक समाधान से नहीं सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था, जमीनी हकीकत समझकर देने होंगे स्थानीय समाधान

हर विद्यालय और छात्र की पृष्ठभूमि अलग होने के कारण एक ही ढर्रे पर काम करना अव्यावहारिक है।

शिक्षा के क्षेत्र में वन-साइज-फिट्स-ऑल का मॉडल जमीनी स्तर पर पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए पूरे प्रदेश या देश के हर स्कूल पर एक ही आदेश थोपना शिक्षा के मूल सिद्धांत के खिलाफ है। कागजों पर दिखने वाली यह व्यवस्था वास्तविक कक्षाओं में कोई बदलाव नहीं ला पा रही है।
​विविधता को समस्या नहीं, ताकत मानने की जरूरत ​एक ही राज्य के विभिन्न स्कूलों में स्थितियां पूरी तरह भिन्न होती हैं कहीं बच्चे पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं तो कहीं पढ़े-लिखे परिवारों से आते हैं।

कहीं एक शिक्षक पूरी प्राथमिक पाठशाला चला रहा है, तो कहीं स्मार्ट क्लासेस उपलब्ध हैं। ऐसे में सभी विद्यालयों से एक समान परिणाम और एक जैसी गति की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है।
​शिक्षा कोई कारखाने की असेंबली लाइन नहीं है जहां हर उत्पाद एक ही साँचे से निकले। शिक्षा एक जीवित प्रक्रिया है, जिसमें हर बच्चा और हर कक्षा एक नई परिस्थिति प्रस्तुत करती है।

​नवाचारों की अंधी नकल बन रही औपचारिकता
​रिपोर्ट के अनुसार जब किसी एक विद्यालय में कोई स्थानीय प्रयोग सफल होता है तो उसकी सफलता का कारण समझे बिना उसे हर जगह अनिवार्य कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए यदि एक शिक्षक ने स्थानीय खिलौनों से गणित सिखाया तो इसे आदेश बनाकर सभी पर लागू कर दिया जाता है। इस कारण जो प्रयोग एक जगह वास्तविक नवाचार था, वह दूसरी जगह केवल एक कागजी औपचारिकता बनकर रह जाता है। किसी सफल नवाचार के केवल परिणाम की नकल करने के बजाय उसके पीछे की प्रक्रिया और स्थानीय संबंधों को समझने की आवश्यकता है। गाँवों, आदिवासी इलाकों और कस्बों की शैक्षणिक समस्याएँ अलग हैं। इनका समाधान केंद्रीय परिपत्रों में नहीं बल्कि स्थानीय सामाजिक ढाँचे में मिलेगा।

दुनिया की सफल शिक्षा प्रणालियाँ नीतियाँ तो तय करती हैं, लेकिन बच्चों को कैसे सिखाना है यह तय करने की स्वतंत्रता शिक्षकों को देती हैं। ​शिक्षा व्यवस्था में तुमने वही तरीका क्यों नहीं अपनाया जो सबको बताया गया था की मानसिकता से बाहर निकलकर शिक्षकों से यह पूछना होगा कि तुम्हारे बच्चों के लिए सबसे उपयुक्त तरीका क्या है? किसी भी नवाचार की सफलता इस बात से तय नहीं होनी चाहिए कि वह पूरे राज्य में लागू हुआ या नहीं बल्कि इस बात से होनी चाहिए कि उसने उस विद्यालय की वास्तविक समस्या का समाधान किया या नहीं।

राजेश कटियार,कानपुर 

 

 

 


ये भी पढे-  भविष्य के निर्माण कर्ता है गुरु : राजेश कटियार 


 

Related Articles

AD
Back to top button